Amrita Pritam

Amrita Pritam
This blog explores the poetry of Amrita Pritam. All her original poems are in Punjabi. I've translated them in Hindi. The Hindi translations are relatively straight forward and there are other authors who have translated her work in Hindi. In some cases, where I could, I have translated a few of her poems in English. This is an entirely different task from Hindi translation. I have major reservations and a few misgivings about any attempt to translate poems in general. All of those concerns apply here in full force. I consider these translations as my musings and explorations: they carry no weight and are no substitute for experiencing the poetry in Punjabi. I am acutely aware of the challenges this may pose to even Hindi readers, let alone English ones. I offer no recourse.

Thursday, April 2, 2020

किस्मत Fate ਕਿਸਮਤ Part 2

Each stanza of the poem stands on its own. 
I've translated a stanza of this poem elsewhere Kismet [Part 1]. Below are a few other selected stanzas. 



किस्मत 


अम्बर की आज मुट्ठी चमके 
यह रातें आज कहाँ से जा के 
चाँद का जुगनू पकड़ लाईं

नींद ने एक पेड़ बोया 
उंगलिआं किस बढ़ई की आज 
सत्तर सपने घड़ आईं 

हमारा सबक मुबारक हमको 
पाँच नमाज़ें बस्ता लेकर 
इश्क़ की मस्जिद चल आईं 

यह जो दिखतीं वेद किताबें 
कौन से दिल की टहनी से 
एक दो पत्तीआं झड़ आईं  

दिल की अँगूठी घड़ी सुनार ने 
एक दिन यह तकदीरें जा के 
दर्द नगीना जड़ आईं 

ओखली एक बिरहा वाली 
देख हमारी उम्र जा के 
इश्क़ का धान झड़ आई

दुनियाँ नें जब सूली गाड़ी 
आशिक़ पास खड़े हो के 
अपनी किस्मत पढ़ आए 


Fate


The sky caught 
a sparkle in its fist;
I wonder from where
the night fetched 
a firefly, moon kissed

The jeweler forged 
my heart into a ring;
one day Fate came in
and set a gem of pain
into the thing

When the world built 
a crucifix;
lovers from far and near
coming to hear their Fate
stood in wait, next to it

[selected verses]



ਕਿਸਮਤ 


ਅੰਬਰ ਦੀ ਅੱਜ ਮੁੱਠੀ ਲਿਸ਼ਕੇ 
ਇਹ ਰਾਤਾਂ ਅੱਜ ਕਿਥੋਂ ਜਾ ਕੇ 
ਚੰਨ - ਟਟਿਹਣਾ ਫੜ ਆਈਆਂ   

ਨੀਂਦਰ ਨੇ ਇਕ ਰੁੱਖ ਬੀਜਿਆ 
ਉਂਗਲਾਂ ਕਿਸ ਤਰਖਾਣ ਦੀਆਂ 
ਅੱਜ ਸੱਤਰ ਸੁਪਨੇ ਘੜ ਆਈਆਂ 

ਸਾਡਾ ਸਬਕ ਮੁਬਾਰਕ ਸਾਨੂੰ 
ਪੰਜ ਨਮਾਜ਼ਾਂ ਬਸਤਾ ਲੈ ਕੇ 
ਇਸ਼ਕ ਮਸੀਤੇ ਵੜ ਆਈਆਂ 

ਇਹ ਜੋ ਦਿੱਸਣ ਵੇਦ ਕਤੇਬਾਂ 
ਕਿਹੜੇ ਦਿਲ ਦੀ ਟਾਹਣੀ ਨਾਲੋਂ 
ਇਕ ਦੋ ਪੱਤੀਆਂ ਝੜ ਆਈਆਂ 

ਦਿਲ ਦੀ ਛਾਪ ਘੜੀ ਸੁਨਿਆਰੇ 
ਇੱਕ ਦਿਨ ਇਹ ਤਕਦੀਰਾਂ ਜਾ ਕੇ 
ਦਰਦ ਨਗੀਨਾ ਜੜ ਆਇਆਂ 

ਉੱਖਲੀ ਇਕ ਵਿਛੌਣੇ ਵਾਲੀ 
ਵੇਖ ਸਾਡੀਆਂ ਉਮਰਾਂ ਜਾ ਕੇ 
ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਝੋਨਾ ਛੜ ਆਈਆਂ 

ਦੁਨੀਆਂ ਨੇ ਜਦ ਸੂਲੀ ਗੱਡੀ 
ਆਸ਼ਕ ਜਿੰਦਾਂ ਕੋਲ ਖਲੋ ਕੇ 
ਆਪਣੀ ਕਿਸਮਤ ਪੜ ਆਈਆਂ 



[Excerpt from the poem किस्मत, Fate, ਕਿਸਮਤ ]

Sunday, February 2, 2020

पाँचवाँ चिराग़ The Fifth Lamp ਪੰਜਵਾਂ ਚਿਰਾਗ਼


The four lamps refer to common practice in Hindu temples where lamps light up four directions. The blessing "may your four lamps be lit forever" means may your path be lit, may you be guided in your pursuits by light from all directions. 

The fifth lamp is a personal one that may light a new path, given by me to you. 



पाँचवाँ चिराग़ 


ना कोई वुज़ू और ना कोई सजदा 
ना मन्नत माँगने आई 
चार चिराग तेरे जलें हमेशां 
मैं पाँचवाँ जलाने आई 

दुःखों को सान मैंने तेल निकलवाया 
माथे की त्योरी -- एक रुई की बत्ती 
मैंने माथे में लगाई  
चार चिराग तेरे जलें हमेशां 
मैं पाँचवाँ जलाने आई 

सोचों के सरोवर हाथों को धोया 
माथे का दिया मैंने हथेलिओं पे रखा 
और रूह की आग छुआई 
चार चिराग तेरे जलें हमेशां 
मैं पाँचवाँ जलाने आई 

तूने ही दिया था मिट्टी का दिया 
मैंने आग का शगुन उसी को डाला 
और तेरी अमानत लौटाई 
चार चिराग तेरे जलें हमेशां 
मैं पाँचवाँ जलाने आई 


The Fifth Lamp


No ablution, no prostration
nor have I come 
seeking benediction

Your four lamps -
May they be lit forever!
I've come to light a fifth 

I pressed oil from my sorrows
My forehead crease - a cotton wick
I placed in the mind's lamp

I washed my hands in the pool 
of thoughts, set the lamp in my palm
and lit it with my soul

Your lamp of clay 
I sanctified with my fire 
and returned it for your keep

Your four lamps - 
May they be lit forever!
I've come to light a fifth 


ਪੰਜਵਾਂ ਚਿਰਾਗ਼ 


ਨਾ ਕੋਈ ਵੁਜ਼ੂ ਤੇ ਨਾ ਕੋਈ ਸਜਦਾ 
ਨਾ ਮੰਨਤ ਮੰਗਣ ਆਈ 
ਚਾਰ ਚਿਰਾਗ਼ ਤੇਰੇ ਬਲਣ ਹਮੇਸ਼ਾਂ 
ਮੈਂ ਪੰਜਵਾਂ ਬਾਲਣ ਆਈ 

ਦੁੱਖਾਂ ਦੀ ਘਾਣੀ ਮੈਂ ਤੇਲ ਕਢਾਇਆ 
ਮੱਥੇ ਦੀ ਤੀਊਡ੍ਰੀ  -- ਇਕ ਰੂੰ ਦੀ ਬੱਤੀ 
ਮੈਂ ਮੱਥੇ ਦੇ ਵਿਚ ਪਾਈ....
ਚਾਰ ਚਿਰਾਗ਼ ਤੇਰੇ ਬਲਣ ਹਮੇਸ਼ਾਂ 
ਮੈਂ ਪੰਜਵਾਂ ਬਾਲਣ ਆਈ 

ਸੋਚਾਂ ਦੇ ਸਰਵਰ ਹੱਥਾਂ ਨੂੰ ਧੋਤਾ 
ਮੱਥੇ ਦਾ ਦੀਵਾ ਮੈਂ ਤਲੀਆਂ ਤੇ ਧਰਿਆ 
ਰੇ ਰੂਹ ਦੀ ਅੱਗ ਛੁਹਾਈ   ....
ਚਾਰ ਚਿਰਾਗ਼ ਤੇਰੇ ਬਲਣ ਹਮੇਸ਼ਾਂ 
ਮੈਂ ਪੰਜਵਾਂ ਬਾਲਣ ਆਈ 

ਤੂੰਹੇਂ ਤੇ ਦਿੱਤਾ ਸੀ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਦੀਵਾ 
ਮੈਂ ਅੱਗ ਦਾ ਸਗਣ ਉਸੇ ਨੂੰ ਪਾਇਆ 
ਤੇ ਅਮਾਨਤ ਮੋੜ ਲਿਆਈ   ....
ਚਾਰ ਚਿਰਾਗ਼ ਤੇਰੇ ਬਲਣ ਹਮੇਸ਼ਾਂ 
ਮੈਂ ਪੰਜਵਾਂ ਬਾਲਣ ਆਈ 





Sunday, December 1, 2019

जाड़ा Winter ਸਿਆਲ

जाड़ा 


जीवन मेरा ठिठुरता 
होंठ नीले हो गए 
और आत्मा के पैर से 
कंपन है चढ़ रही 

बरसों के बादल गरजते 
इस उम्र के आसमान पे 
आँगन के बीच पड़ रहे 
क़ानून, गोले बर्फ़ के 

गलियों के कीचड़ लांघ कर 
अगर आज तू आये कहीं 
तो पैर तेरे मैं धो दूँ 
बुत तेरा सूरजी 
कंबल का कोना उठा कर 
मैं हड्डियों की ठंड भंग करूँ 

एक कटोरी धूप की 
मैं गटक के पी लूँ 
और एक टुकड़ा धूप का 
मैं कोख़ में डाल लूँ 

तो फिर शायद जनम का 
यह जाड़ा गुज़र जायेगा 


Winter


My life is shivering
          my lips have turned blue;
          up my feet runs a trembling
          of conscience

The years thunder like clouds 
          across my life sky;
          in courtyard falls 
          the snow of laws 

Should you cross 
          the muddy lanes
          to visit me today,
          I shall wash your feet 

Your face - the sun:
          I shall lift 
          the edge of its blanket
          and warm my bones 

A cup of sunshine
          I shall gulp down;
          a patch of sunlight
          I shall place in my womb

Perhaps then shall pass
          this winter of life



ਸਿਆਲ 


ਜਿੰਦ ਮੇਰੀ ਠੁਰਕਦੀ 
ਹੋੰਠ ਨੀਲੇ ਹੋ ਗਏ 
ਤੇ ਆਤਮਾ ਦੇ ਪੈਰ ਵਿਚੋਂ 
ਕੰਬਣੀ ਚੜਦੀ ਪਈ ...

ਵਰ੍ਹਿਆਂ ਦੇ ਬੱਦਲ ਗਰਜਦੇ 
ਇਸ ਉਮਰ ਦੇ ਅਸਮਾਨ 'ਤੇ 
ਵੇਹੜੇ ਦੇ ਵਿਚ ਪੈਂਦੇ ਪਏ 
ਕ਼ਾਨੂਨ , ਗੋਹੜੇ ਬਰਫ਼ ਦੇ ...

ਗਲੀਆਂ ਦੇ ਚਿਕੜ ਲੰਘ ਕੇ 
ਜੇ ਅੱਜ ਤੂੰ ਆਵੇਂ ਕੀਤੇ 
ਮੈਂ ਪੈਰ ਤੇਰੇ ਧੋ ਦੀਆਂ 
ਬੁੱਤ ਤੇਰਾ ਸੂਰਜੀ 
ਕੱਬਲ ਦੀ ਕੰਨੀ ਚੁੱਕ ਕੇ 
ਮੈਂ ਹੱਡਾਂ ਦਾ ਠਾਰ ਭੰਨ ਲਾਂ। ...

ਇਕ ਕੌਲੀ ਧੁੱਪ ਦੀ 
ਮੈਂ ਡੀਕ ਲਾ ਕੇ ਪੀ ਲਵਾਂ 
ਤੇ ਇਕ ਟੋਟਾ ਧੁੱਪ ਦਾ 
ਮੈਂ ਕੁੱਖ ਦੇ ਵਿਚ ਪਾ ਲਵਾਂ। ...

ਤੇ ਫੇਰ ਖ਼ੌਰੇ ਜਨਮ ਦਾ 
ਇਹ ਸਿਆਲ ਗੁਜ਼ਰ ਜਾਏਗਾ। ... 

Thursday, November 28, 2019

दर ना बंद कर ज़िन्दगी Don't shut the door yet ਦਰ ਨਾ ਭੀੜ ਹਯਾਤੀਏ !


दर ना बंद कर ज़िन्दगी


दर ना बंद कर ज़िन्दगी
रख सब्र की लाज
रेगिस्तान में आ रही
क़दमों की आवाज़

दर ना बंद कर ज़िन्दगी
अभी ख़त्म हुआ ना पंथ
सूरज छिड़के रौशनी
धरती मले सुगंध

दर ना बंद कर ज़िन्दगी
देख ज़रा एक चिर  
माथे किरणें बाँध कर
सूरज आया फिर

दर ना बंद कर ज़िन्दगी
देख, ज़रा सा ठहर
कटोरा पकड़ा इश्क़ ने
ज़िंदगी कर दे ख़ैर

select verses


Don't shut the door yet


O my Life!
Don't shut the door yet!
Respect 
my patience, my dignity
I hear steps in the sand
coming towards me

O my Life!
Don't shut the door yet!
The road has not ended
The sun is spreading sunshine 
The earth is still scented

O my Life!
Don't shut the door yet!
Look at the horizon
with rays on its forehead
here comes the sun

O my Life!
Don't shut the door yet!
Wait a moment in this realm
Love has found a bowl 
May life fill it with alms!




ਦਰ ਨਾ ਭੀੜ ਹਯਾਤੀਏ !


ਦਰ ਨਾ ਭੀੜ ਹਯਾਤੀਏ !
ਰੱਖ ਸਿਦਕ ਦੀ ਲਾਜ
ਰੇਤ ਥਲਾਂ ਵਿੱਚ ਆ ਰਹੀ
ਕਦਮਾਂ ਦੀ ਆਵਾਜ਼

ਦਰ ਨਾ ਭੀੜ ਹਯਾਤੀਏ !
ਅਜੇ ਨਾ ਮੁੱਕਾ ਪੰਧ
ਸੂਰਜ ਧੂੜੇ ਚਾਨਣਾ
ਧਰਤੀ ਮਲੇ ਸੁਗੰਧ

ਦਰ ਨਾ ਭੀੜ ਹਯਾਤੀਏ !
ਵੇਖ ਜਰਾ ਇਕ ਵੇਰ
ਮੱਥੇ ਕਿਰਨਾਂ ਬੰਨ ਕੇ
ਸੂਰਜ ਆਇਆ ਫੇਰ

ਦਰ ਨਾ ਭੀੜ ਹਯਾਤੀਏ !
ਵੇਖ ਜਰਾ ਕੁ ਠਹਿਰ
ਕਾਸਾ ਫੜਿਆ ਇਸ਼ਕ ਨੇ
ਜ਼ਿੰਦੜੀ ਪਾ ਦੇ ਖ਼ੈਰ


Wednesday, November 27, 2019

अल्लाह ਅੱਲਾ

अल्लाह 


अल्लाह ! यह कौन आया है 
कि तेरी जगह ज़ुबान पर आज उस का नाम आया है 

अल्लाह ! यह कौन आया है 
कि लोग कहते हैं
मेरी तकदीर के घर से मेरा पैग़ाम आया है 

अल्लाह ! यह कौन आया है 
यह नसीब धरती के 
उसके हुस्न को खुदा का एक सलाम आया है 

अल्लाह ! यह कौन आया है 
आज दिन मुबारक है 
कि मेरी ज़ात पे आज इश्क़ का इलज़ाम आया है 

अल्लाह ! यह कौन आया है 
नज़र भी हैरान है 
कि आज मेरी राह में कैसा यह मकाम आया है 

अल्लाह ! यह कौन आया है 
कि तेरी जगह ज़ुबान पर आज उस का नाम आया है 





ਅੱਲਾ 


ਅੱਲਾ ! ਇਹ ਕੌਣ ਆਇਆ ਹੈ 
ਕਿ ਤੇਰੀ ਜਗ੍ਹਾ ਜ਼ੁਬਾਨ ਤੇ ਅੱਜ ਉਸ ਦਾ ਨਾਮ ਆਇਆ ਹੈ 

ਅੱਲਾ ! ਇਹ ਕੌਣ ਆਇਆ ਹੈ 
ਕਿ ਲੋਕ ਕਹਿੰਦੇ ਨੇਂ  --
ਮੇਰੀ ਤਕਦੀਰ ਦੇ ਘਰ ਤੋਂ ਮੇਰਾ ਪੈਗ਼ਾਮ ਆਇਆ ਹੈ 

ਅੱਲਾ ! ਇਹ ਕੌਣ ਆਇਆ ਹੈ 
ਇਹ ਨਸੀਬ ਧਰਤੀ ਦੇ  -
ਇਹ ਉਸਦੇ ਹੁਸਨ ਨੂੰ ਖੁਦਾ ਦਾ ਇਕ ਸਲਾਮ ਆਇਆ ਹੈ 

ਅੱਲਾ ! ਇਹ ਕੌਣ ਆਇਆ ਹੈ 

ਅਜ ਦਿਨ ਮੁਬਾਰਕ ਹੈ --
ਕਿ ਮੇਰੀ ਜ਼ਾਤ ਤੇ ਅੱਜ ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਇਲਜ਼ਾਮ ਆਇਆ ਹੈ 

ਅੱਲਾ ! ਇਹ ਕੌਣ ਆਇਆ ਹੈ 
ਨਜ਼ਰ ਵੀ ਹੈਰਾਨ ਹੈ --
ਕਿ ਅੱਜ ਮੇਰੇ ਰਾਹ ਵਿਚ ਕਿਹੋ ਜਿਹਾ ਮੁਕਾਮ ਆਇਆ ਹੈ 

ਅੱਲਾ ! ਇਹ ਕੌਣ ਆਇਆ ਹੈ 

ਕਿ ਤੇਰੀ ਜਗ੍ਹਾ ਜ਼ੁਬਾਨ ਤੇ ਅੱਜ ਉਸ ਦਾ ਨਾਮ ਆਇਆ ਹੈ 

रब जी ! Savior ਰੱਬ ਜੀ !



Amrita uses as metaphor the ancient Sufi and Hindu tradition in India of tying threads or pieces of cloth to trees to make a wish [mannat].  Usually, people ask their pirs, gods or spiritual leaders to fulfill their wishes. Once their wish is fulfilled, people return to untie the threads. 

Here Amrita reverses the order by having her god ask of her an unspoken wish. She fulfills god's wish through the words she writes and endures the persecution by others for her words - without regret. She remains true until her last word, and poignantly asks her god to come see how she has fulfilled the wish asked of her. 

This sacred reverence for the written word ["akhar"] shows up in several other poems of Amrita. In fact, her poem "Akhar" [Words] is the most autobiographical poem where she develops this idea fully.  


रब जी !


रब जी ! तूने मेरे पेड़ पे आके 
एक दिन मन्नत माँगी 
और चोली की फाड़ के कन्नी 
पेड़ की टहनी बाँधी 

मैंने अपने लहू का एक एक कतरा 
एक एक अक्षर बनाया 
और वही मेरा एक एक अक्षर 
जग ने सूली चढ़ाया
मैंने इस जनम की लाज बचाई 
आँख कभी ना भीगी     
रब जी ! तूने मेरे पेड़ पे आके 
एक दिन मन्नत माँगी 

आओ रब जी पेड़ से 
अब कन्नी खोलने आओ 
और पेड़ का आख़री अक्षर 
अपनी झोली में बिछाओ   
इस पेड़ पे जो तुमने मन्नत माँगी 
वही मन्नत हुई अब पूरी   
रब जी ! तूने मेरे पेड़ पे आके 
एक दिन मन्नत माँगी 



Savior


Once You came to my tree
          to make a wish
You tore a ribbon 
          from your bodice
          and tied it to a twig 

I took every drop of my blood
          and wrote words with it
But every word I wrote
          the world nailed it 
          to a crucifix

Yet I kept the dignity 
          of my life
Never shedding 
          a single tear
          from my eyes

You, come back to my tree
          untie the knot
Set the ribbon free
          and rest in your lap
          my last word

See! that wish 
          you made of me
          I fulfilled it
Once You came to my tree
          to make a wish




ਰੱਬ ਜੀ !


ਰੱਬ ਜੀ  ! ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਰੁੱਖ ਤੇ ਆਕੇ 
ਇਕ ਦਿਨ ਮੰਨਤ ਮੰਨੀ 
ਤੇ ਚੋਲੇ ਨਾਲੋਂ ਪਾੜ ਕੇ ਕੰਨੀ 
ਰੁੱਖ ਦੀ ਟਾਹਣੀ ਬੰਨੀ। ...

ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਲਹੂ ਦਾ ਇਕ ਇਕ ਟੇਪਾ
ਇਕ ਇਕ ਅੱਖਰ ਘੜਿਆ 
ਤੇ ਓਹੀਓ ਮੇਰਾ ਇਕ ਇਕ ਅੱਖਰ 
ਜੱਗ ਦੀ ਸੂਲੀ ਚੜਿਆ 
ਮੈਂ ਏਸ ਜਨਮ ਦੀ ਲਾਜ ਬਚਾਹੀ 
ਅੱਖ ਕਦੇ ਨਾ ਰੁੰਨੀ। ...
ਰੱਬ ਜੀ ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਰੁੱਖ ਤੇ ਆਕੇ 
ਇਕ ਦਿਨ ਮੰਨਤ ਮੰਨੀ। ...

ਆਵੋ ਰੱਬ ਜੀ ਰੁੱਖ ਨਾਲੋਂ 
ਹੁਣ ਟਾਕੀ ਖੋਲ੍ਹਣ ਆਵੋ  !
ਤੇ ਰੁੱਖ ਦਾ ਇਕ ਅਖੀਰੀ ਅੱਖਰ 
ਆਪਣੀ ਝੋਲੀ ਪਾਵੋ  !
ਇਸ ਰੁੱਖ ਤੁਸਾਂ ਜੋ ਮੰਨਤ ਮੰਨੀ
ਓਹੀਓ ਮੰਨਤ ਪੁੰਨੀ। ...
ਰੱਬ ਜੀ  ! ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਰੁੱਖ ਤੇ ਆਕੇ 
ਇਕ ਦਿਨ ਮੰਨਤ ਮੰਨੀ। ...


Raba jī!

Raba jī  ! Tū mērē rukha tē ākē 
ika dina manata manī 
tē cōlē nālōṁ pāṛa kē kanī 
rukha dī ṭāhaṇī banī. ...

Maiṁ āpaṇē lahū dā ika ika ṭēpā
ika ika akhara ghaṛi'ā 
tē ōhī'ō mērā ika ika akhara 
jaga dī sūlī caṛi'ā 
maiṁ ēsa janama dī lāja bacāhī 
akha kadē nā runī. ...
Raba jī tū mērē rukha tē ākē 
ika dina manata manī. ...

Āvō raba jī rukha nālōṁ 
huṇa ṭākī khōl'haṇa āvō  !
Tē rukha dā ika akhīrī akhara 
āpaṇī jhōlī pāvō  !
Isa rukha tusāṁ jō manata manī
ōhī'ō manata punī. ...
Raba jī  ! Tū mērē rukha tē ākē 
ika dina manata manī. …

rab jee !

rab jee ! toone mere ped pe aake 
ek din mannat maangee 
aur cholee kee phaad ke kannee 
ped kee tahanee baandhee 

mainne apane lahoo ka ek ek katara 
ek ek akshar banaaya 
aur vahee mera ek ek akshar 
jag ne soolee chadhaaya
mainne is janam kee laaj bachaee 
aankh kabhee na bheegee     
rab jee ! toone mere ped pe aake 
ek din mannat maangee 

aao rab jee ped se 
ab kannee kholane aao 
aur ped ka aakharee akshar 
apanee jholee mein bichhao   
is ped pe jo tumane mannat maangee 
vahee mannat huee ab pooree   
rab jee ! toone mere ped pe aake 
ek din mannat maangee


Sunday, November 24, 2019

आग Fire ਅੱਗ

आग 


परछायीओं को पकड़ने वालों  !
छाती में जलती आग की  - 
परछाई नहीं होती 

Fire


You, who are chasing shadows !
Fire burning in the breast
Casts no shadow

ਅੱਗ 


ਪਰਛਾਵਿਆਂ ਨੂੰ ਪਕੜਣ ਵਾਲਿਓਂ  !
ਛਾਤੀ 'ਚ ਬਲਦੀ ਅੱਗ ਦਾ  -
ਪਰਛਾਵਾਂ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ 

Aga 


parachāvi'āṁ nū pakaṛaṇa vāli'ōṁ  !

Chātī'ca baladī aga dā  -

parachāvāṁ nahīṁ hudā


aag 


parachhaayeeon ko pakadane vaalon  !

chhaatee mein jalatee aag kee  - 

parachhaee nahin hotee